भोपाल की सड़कों पर पिछले तीन साल में 645 से ज्यादा मौतें हुई हैं. 2023 में 196, 2024 में 235 और 2025 में 214 मौतें दर्ज हुई. राजधानी में 16 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 मौतें हुई हैं.

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Posted by CityPolice-Admin on 2026-03-25 07:16:59 |

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भोपाल की सड़कों पर पिछले तीन साल में 645 से ज्यादा मौतें हुई हैं. 2023 में 196, 2024 में 235 और 2025 में 214 मौतें दर्ज हुई. राजधानी में 16 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 मौतें हुई हैं.

भोपाल में ब्लैक स्पॉट्स बने खतरा, सड़क हादसों से 3 साल में 645 की मौतें

भोपाल की सड़कों पर पिछले तीन साल में 645 से ज्यादा मौतें हुई हैं. 2023 में 196, 2024 में 235 और 2025 में 214 मौतें दर्ज हुई. राजधानी में 16 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 मौतें हुई हैं. भोपाल में 5 स्पॉट्स सुरक्षित घोषित हुए लेकिन 11 पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है. मिसरोद सबसे घातक क्षेत्र जहां 2025 में 26 मौतें हुई हैं. सरकारी बजट 3.98 करोड़ मिला लेकिन काम फंसा हुआ है. भोपाल में खराब ब्रिज और वाहनों के तेज बेकाबू रफ्तार मौतों का कारण बन गई है

भोपाल. राजधानी की सड़कों पर सफर अब मौत और एक्सीडेंट का बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में भोपाल में 645 से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं. प्रशासन ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने का दावा करता है लेकिन जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है. हर दूसरे दिन एक मौत हो रही है और रफ्तार, खराब इंजीनियरिंग तथा ट्रैफिक प्रबंधन की कमी मौत का कारण बन रही है. यह स्थिति शहर की पहचान ट्रैफिक जाम, सड़क हादसे, खराब डिजाइन वाले ब्रिज और ब्लैक स्पॉट्स बन गई है. पिछले तीन सालों का डेटा सिस्टम की विफलता और प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना ठोस इंजीनियरिंग सुधार और सख्त प्रवर्तन के ये आंकड़े और बढ़ेंगे. सवाल है कि भोपाल की सड़कें अब मासूमों का खून क्यों मांग रही हैं?

भोपाल में वर्ष 2023 में 2,906 हादसों में 196 मौतें हुई. 2024 सबसे घातक साल साबित हुआ जहां 235 मौतें दर्ज की गई. 2025 में मामूली गिरावट आई और 214 मौतें हुई लेकिन खतरा बरकरार है. ब्लैक स्पॉट्स पर 2022-2024 में 99 गंभीर हादसे हुए जिसमें 27 मौतें हुई. फरवरी 2026 की रिपोर्ट में भोपाल पुलिस ने 16 ब्लैक स्पॉट्स में से 5 को सुरक्षित घोषित कर सूची से हटा दिया जिसमें डीबी मॉल क्रॉसिंग, चिरायु अस्पताल चौराहा और बेस्ट प्राइस क्रॉसिंग शामिल हैं. अब 11 ब्लैक स्पॉट्स बचे हैं जो शहर के लिए खतरा है. हादसों को रोकने के लिए नगर निगम को 3.98 करोड़ का बजट मिला लेकिन सुस्ती के कारण ज्यादातर काम फाइलों में अटके हैं. ट्रैफिक पुलिस लगातार मीटिंग और पत्राचार कर रही है लेकिन जमीनी बदलाव कम हैं. ब्रिजों का खराब डिजाइन और रफ्तार मौतों का कारण बनी हुई है.

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