Posted by CityPolice-Admin on 2026-03-25 07:33:40 |
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अंडे और गुड़ से बने गारे की ताकत, हैदराबाद का दबीरपुरा दरवाजा सदियों से क्यों है अडिग
Hyderabad News: हैदराबाद के पुराने शहर में दबीरपुरा दरवाजा 18वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर है. यह दरवाजा 1908 की बाढ़ में भी अडिग रहा. इसकी निर्माण सामग्री में अंडे की सफेदी, गुड़ और उड़द की दाल का उपयोग हुआ था. समय के साथ इन ऐतिहासिक दरवाजों में से अधिकांश नष्ट हो गए. आज केवल दो दरवाजे ही सही सलामत बचे हैं, जिनमें दबीरपुरा और पुरानापुल शामिल हैं.
हैदराबाद, आधुनिकता की तेज दौड़ में आगे बढ़ते हैदराबाद के पुराने शहर में आज भी कुछ ऐसी ऐतिहासिक विरासतें मौजूद हैं जो समय के थपेड़ों को झेलते हुए अपनी मजबूती की कहानी सुनाती हैं. इन्हीं में से एक है दबीरपुरा दरवाजा. 18वीं शताब्दी में बना यह दरवाजा उन 13 ऐतिहासिक द्वारों में शामिल था जो कभी शहर की सुरक्षा करने वाली किलेबंदी का हिस्सा हुआ करते थे.
समय के साथ इन ऐतिहासिक दरवाजों में से अधिकांश नष्ट हो गए. आज केवल दो दरवाजे ही सही सलामत बचे हैं, जिनमें दबीरपुरा और पुरानापुल शामिल हैं. इनमें भी दबीरपुरा दरवाजा अपनी अनोखी निर्माण शैली और मजबूत संरचना के कारण विशेष रूप से चर्चा में रहता है.
अनूठी निर्माण सामग्री से बनी मजबूत संरचना
इस दरवाजे की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण सामग्री मानी जाती है. इतिहासकार जाहिद सरकार के अनुसार इसके निर्माण में पारंपरिक चूना और पत्थर के साथ एक विशेष मिश्रण का उपयोग किया गया था. इस मिश्रण में अंडे की सफेदी, गुड़ और उड़द की दाल को मिलाकर गारा तैयार किया गया था.